गणित की नींव — संख्या पद्धति का पूर्ण अध्याय। शून्य से लेकर उन्नत स्तर तक, सरल हिंदी में समझें। स्कूल परीक्षा, SSC, Railway, Banking, Police, UPSC और सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी।
गणित की सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण अवधारणा को समझें
संख्या पद्धति गणित का वह आधार है जिस पर पूरी गणित की इमारत खड़ी है। जब हम गिनती करते हैं, मापते हैं, तुलना करते हैं, या किसी राशि को व्यक्त करते हैं — हम संख्याओं का उपयोग करते हैं। संख्या पद्धति वह व्यवस्था है जिसमें हम संख्याओं को लिखते हैं, पढ़ते हैं, वर्गीकृत करते हैं और उन पर संक्रियाएँ (operations) करते हैं।
सरल शब्दों में — "संख्याओं को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने की विधि को संख्या पद्धति कहते हैं।"
हम दैनिक जीवन में जिस संख्या पद्धति का सबसे अधिक उपयोग करते हैं उसे दशमलव पद्धति (Decimal System) कहते हैं। इसमें 10 अंकों (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9) का उपयोग होता है। लेकिन कंप्यूटर की भाषा में द्विआधारी पद्धति (Binary System) का उपयोग होता है जिसमें केवल 0 और 1 होते हैं।
संख्या पद्धति गणित की "वर्णमाला" है — जैसे बिना अक्षरों के भाषा नहीं बन सकती, वैसे ही बिना संख्या पद्धति के गणित नहीं बन सकता।
आधार (Base) के अनुसार संख्या पद्धति चार प्रकार की होती है:
प्रत्येक प्रकार की संख्या को विस्तार से समझें
संख्याएँ एक-दूसरे से कैसे संबंधित हैं, इसे समझना बहुत ज़रूरी है:
"N ⊂ W ⊂ Z ⊂ Q ⊂ R" — यानी प्राकृत संख्याएँ, पूर्ण संख्याओं के अंदर; पूर्ण संख्याएँ, पूर्णांकों के अंदर; पूर्णांक, परिमेय के अंदर; और परिमेय, वास्तविक के अंदर।
परिभाषा: गिनती की संख्याओं को प्राकृत संख्याएँ कहते हैं। ये 1 से शुरू होती हैं और अनंत तक जाती हैं।
उदाहरण: 1, 2, 3, 4, 5, 10, 100, 1000, ...
ध्यान दें: 0 प्राकृत संख्या नहीं है। ऋणात्मक संख्याएँ और भिन्न भी प्राकृत संख्याएँ नहीं हैं।
परिभाषा: प्राकृत संख्याओं में 0 (शून्य) जोड़ देने पर पूर्ण संख्याएँ बनती हैं।
उदाहरण: 0, 1, 2, 3, 4, 5, ...
प्राकृत संख्याएँ 1 से शुरू होती हैं, पूर्ण संख्याएँ 0 से शुरू होती हैं। बस यही एक अंतर है!
परिभाषा: पूर्ण संख्याओं और उनकी ऋणात्मक संख्याओं के समुच्चय को पूर्णांक कहते हैं। इसमें धनात्मक, ऋणात्मक और शून्य — तीनों शामिल हैं।
$\mathbb{Z}^+ = \{1, 2, 3, 4, \ldots\}$ — ये प्राकृत संख्याएँ ही हैं
$\mathbb{Z}^- = \{\ldots, -3, -2, -1\}$ — शून्य से छोटी संख्याएँ
$\{0, 1, 2, 3, \ldots\}$ — ये पूर्ण संख्याएँ ही हैं
शून्य के दाईं ओर धनात्मक पूर्णांक और बाईं ओर ऋणात्मक पूर्णांक होते हैं। शून्य न धनात्मक है न ऋणात्मक।
परिभाषा: वे संख्याएँ जिन्हें $\frac{p}{q}$ के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ p और q पूर्णांक हैं और $q \neq 0$, परिमेय संख्याएँ कहलाती हैं।
उदाहरण:
हर भिन्न परिमेय संख्या है, लेकिन हर परिमेय संख्या भिन्न के रूप में नहीं दिखती। जैसे 5 भी परिमेय है क्योंकि $5 = \frac{5}{1}$।
परिभाषा: वे संख्याएँ जिन्हें $\frac{p}{q}$ के रूप में नहीं लिखा जा सकता, अपरिमेय संख्याएँ कहलाती हैं। इनका दशमलव प्रसार अनंत और अनावर्ती (non-repeating) होता है।
उदाहरण:
यदि किसी संख्या का वर्गमूल पूर्ण संख्या नहीं आता, तो वह अपरिमेय है। जैसे $\sqrt{4} = 2$ (परिमेय), लेकिन $\sqrt{5} = 2.236...$ (अपरिमेय)।
परिभाषा: परिमेय और अपरिमेय संख्याओं के समुच्चय को वास्तविक संख्याएँ कहते हैं। संख्या रेखा पर जो भी बिंदु है, वह एक वास्तविक संख्या है।
परिभाषा: वे प्राकृत संख्याएँ जो 1 से बड़ी हैं और जिनके केवल दो गुणनखंड (factors) हैं — 1 और स्वयं वह संख्या — अभाज्य संख्याएँ कहलाती हैं।
• 1 न अभाज्य है, न भाज्य।
• 2 सबसे छोटी अभाज्य संख्या है और एकमात्र सम अभाज्य संख्या है।
• 1 से 50 तक = 15 अभाज्य संख्याएँ
• 1 से 100 तक = 25 अभाज्य संख्याएँ
• 1 से 200 तक = 46 अभाज्य संख्याएँ
• 1 से 1000 तक = 168 अभाज्य संख्याएँ
परिभाषा: वे प्राकृत संख्याएँ जो 1 से बड़ी हैं और जिनके दो से अधिक गुणनखंड हैं, भाज्य संख्याएँ कहलाती हैं।
उदाहरण: 4, 6, 8, 9, 10, 12, 14, 15, 16, 18, 20, ...
4 सबसे छोटी भाज्य संख्या है।
परिभाषा: दो संख्याएँ जिनका महत्तम समापवर्तक (HCF) 1 हो, सह-अभाज्य कहलाती हैं। ज़रूरी नहीं कि दोनों संख्याएँ अभाज्य हों।
उदाहरण: (8, 15), (14, 25), (3, 7), (4, 9), (21, 22)
दो क्रमागत प्राकृत संख्याएँ हमेशा सह-अभाज्य होती हैं। जैसे (5,6), (12,13), (100,101)।
वे संख्याएँ जो 2 से पूर्णतः विभाजित हो जाएँ।
उदाहरण: 2, 4, 6, 8, 10, 12, ...
सूत्र: $2n$ जहाँ $n \in \mathbb{Z}$
वे संख्याएँ जो 2 से पूर्णतः विभाजित न हों।
उदाहरण: 1, 3, 5, 7, 9, 11, ...
सूत्र: $2n+1$ जहाँ $n \in \mathbb{Z}$
वे संख्याएँ जो एक के बाद एक लगातार आती हैं (अंतर = 1)।
उदाहरण: 5, 6, 7, 8, 9
क्रमागत सम: 2, 4, 6, 8 (अंतर = 2)
क्रमागत विषम: 1, 3, 5, 7 (अंतर = 2)
भिन्न: $\frac{p}{q}$ के रूप की संख्या, जहाँ $q \neq 0$। p = अंश (Numerator), q = हर (Denominator)
दशमलव के बाद अंक एक निश्चित स्थान पर रुक जाते हैं।
उदाहरण: 0.5, 0.25, 0.125, 2.75
ये हमेशा परिमेय होती हैं।
दशमलव के बाद अंक अनंत तक चलते हैं।
दो प्रकार: आवर्ती (repeating) और अनावर्ती (non-repeating)
कुछ अंक बार-बार दोहराए जाते हैं।
$0.\overline{3} = 0.333\ldots = \frac{1}{3}$
$0.\overline{142857} = \frac{1}{7}$
ये परिमेय होती हैं।
कोई पैटर्न नहीं दोहराता।
$\sqrt{2} = 1.41421356\ldots$
$\pi = 3.14159265\ldots$
ये अपरिमेय होती हैं।
जातीय मान (Face Value): अंक का अपना मान, चाहे वह किसी भी स्थान पर हो।
स्थानीय मान (Place Value): अंक × उसके स्थान का मान
मानक रूप: 5,38,726
विस्तारित रूप: $5 \times 10^5 + 3 \times 10^4 + 8 \times 10^3 + 7 \times 10^2 + 2 \times 10^1 + 6 \times 10^0$
संख्या रेखा एक सीधी रेखा है जिस पर संख्याओं को उनके मान के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है।
• दाईं ओर जाने पर संख्या बढ़ती है, बाईं ओर जाने पर घटती है
• 0 के दाईं ओर = धनात्मक, बाईं ओर = ऋणात्मक
• हर वास्तविक संख्या को संख्या रेखा पर दर्शाया जा सकता है
वे संख्याएँ जो दी गई संख्या को पूर्णतः विभाजित कर दें।
12 के गुणनखंड: 1, 2, 3, 4, 6, 12
• गुणनखंड संख्या से ≤ होते हैं
• गुणनखंडों की संख्या सीमित होती है
दी गई संख्या को 1, 2, 3, ... से गुणा करने पर प्राप्त संख्याएँ।
12 के गुणज: 12, 24, 36, 48, 60, ...
• गुणज संख्या से ≥ होते हैं
• गुणजों की संख्या अनंत होती है
जोड़: $a + b = b + a$ उदाहरण: $3 + 5 = 5 + 3 = 8$
गुणा: $a \times b = b \times a$ उदाहरण: $4 \times 6 = 6 \times 4 = 24$
⚠️ घटाव और भाग में क्रमविनिमेय गुण लागू नहीं होता।
जोड़: $(a + b) + c = a + (b + c)$
गुणा: $(a \times b) \times c = a \times (b \times c)$
$a \times (b + c) = a \times b + a \times c$
उदाहरण: $3 \times (4 + 5) = 3 \times 4 + 3 \times 5 = 12 + 15 = 27$
जोड़ का तत्समक: $a + 0 = a$ (शून्य जोड़ का तत्समक है)
गुणा का तत्समक: $a \times 1 = a$ (एक गुणा का तत्समक है)
योगात्मक विलोम: $a + (-a) = 0$
गुणात्मक विलोम: $a \times \frac{1}{a} = 1$ (जहाँ $a \neq 0$)
भ्रम दूर करें — अंतर समझें
| आधार | परिमेय संख्याएँ | अपरिमेय संख्याएँ |
|---|---|---|
| परिभाषा | $\frac{p}{q}$ रूप में लिखी जा सकती हैं | $\frac{p}{q}$ रूप में नहीं लिखी जा सकतीं |
| दशमलव प्रसार | सांत या आवर्ती | असांत और अनावर्ती |
| उदाहरण | $\frac{1}{2}, 0.5, 0.\overline{3}, 7$ | $\sqrt{2}, \pi, e, \sqrt{3}$ |
| संख्या रेखा | संख्या रेखा पर दर्शा सकते हैं | संख्या रेखा पर दर्शा सकते हैं |
| प्रतीक | $\mathbb{Q}$ | $\mathbb{R} - \mathbb{Q}$ |
| आधार | अभाज्य | भाज्य | सह-अभाज्य |
|---|---|---|---|
| गुणनखंड | केवल 2 (1 और स्वयं) | 2 से अधिक | दो संख्याओं का HCF = 1 |
| उदाहरण | 2, 3, 5, 7, 11 | 4, 6, 8, 9, 10 | (8,15), (4,9) |
| सबसे छोटी | 2 | 4 | (1,2) |
| विशेष | 2 एकमात्र सम अभाज्य | 1 न भाज्य न अभाज्य | संख्याएँ स्वयं अभाज्य न भी हों |
| आधार | HCF (म.स.) | LCM (ल.स.) |
|---|---|---|
| पूरा नाम | Highest Common Factor | Least Common Multiple |
| हिंदी | महत्तम समापवर्तक (म.स.) | लघुत्तम समापवर्त्य (ल.स.) |
| अर्थ | सबसे बड़ा उभयनिष्ठ गुणनखंड | सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज |
| मान | संख्याओं से ≤ | संख्याओं से ≥ |
| सूत्र | $\text{HCF} \times \text{LCM} = a \times b$ | $\text{LCM} = \frac{a \times b}{\text{HCF}}$ |
| आधार | गुणनखंड (Factor) | गुणज (Multiple) |
|---|---|---|
| अर्थ | जो संख्या को पूर्णतः विभाजित करे | संख्या × कोई पूर्णांक |
| आकार | संख्या से छोटा या बराबर | संख्या से बड़ा या बराबर |
| संख्या | सीमित (finite) | अनंत (infinite) |
| उदाहरण (12) | 1, 2, 3, 4, 6, 12 | 12, 24, 36, 48, ... |
| प्रकार | दशमलव प्रसार | परिमेय/अपरिमेय | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| सांत (Terminating) | रुक जाता है | परिमेय | 0.5, 0.25, 2.75 |
| आवर्ती (Recurring) | अनंत, पैटर्न दोहराता है | परिमेय | $0.\overline{3}, 0.\overline{12}$ |
| अनावर्ती (Non-recurring) | अनंत, कोई पैटर्न नहीं | अपरिमेय | $\sqrt{2}, \pi$ |
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| संख्या | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| 2 | इकाई का अंक 0, 2, 4, 6, 8 हो | 246 ✓ (इकाई = 6) |
| 3 | अंकों का योग 3 से विभाज्य हो | 123 → 1+2+3=6 ✓ |
| 4 | अंतिम दो अंक 4 से विभाज्य हों | 312 → 12 ÷ 4 = 3 ✓ |
| 5 | इकाई का अंक 0 या 5 हो | 345 ✓ (इकाई = 5) |
| 6 | 2 और 3 दोनों से विभाज्य हो | 24 → 2 से ✓, 3 से ✓ |
| 7 | इकाई अंक × 2 को शेष से घटाएँ, परिणाम 7 से विभाज्य हो | 161 → 16 - 2 = 14 ✓ |
| 8 | अंतिम तीन अंक 8 से विभाज्य हों | 1040 → 040 ÷ 8 = 5 ✓ |
| 9 | अंकों का योग 9 से विभाज्य हो | 729 → 7+2+9=18 ✓ |
| 10 | इकाई का अंक 0 हो | 350 ✓ |
| 11 | विषम स्थानों के अंकों का योग - सम स्थानों के अंकों का योग = 0 या 11 से विभाज्य | 121 → (1+1) - 2 = 0 ✓ |
किसी संख्या को उसके अभाज्य गुणनखंडों के गुणनफल के रूप में लिखना।
HCF: सभी उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंडों की न्यूनतम घातों का गुणनफल
LCM: सभी अभाज्य गुणनखंडों की अधिकतम घातों का गुणनफल
विस्तृत व्याख्या और उदाहरण सहित
विभाज्यता नियम वे शॉर्टकट हैं जिनसे हम बिना भाग दिए जान सकते हैं कि कोई संख्या दूसरी संख्या से विभाज्य है या नहीं।
नियम: इकाई का अंक 0, 2, 4, 6, या 8 हो।
उदाहरण: 246 → इकाई = 6 → 2 से विभाज्य ✓
उदाहरण: 357 → इकाई = 7 → 2 से विभाज्य नहीं ✗
तर्क: 10, 100, 1000... सभी 2 से विभाज्य हैं, इसलिए केवल इकाई अंक मायने रखता है।
नियम: सभी अंकों का योग 3 से विभाज्य हो।
उदाहरण: 456 → 4+5+6 = 15 → 15 ÷ 3 = 5 → विभाज्य ✓
उदाहरण: 1234 → 1+2+3+4 = 10 → 10 ÷ 3 ≠ पूर्णांक → विभाज्य नहीं ✗
नियम: अंतिम दो अंकों से बनी संख्या 4 से विभाज्य हो।
उदाहरण: 5,312 → 12 ÷ 4 = 3 → विभाज्य ✓
उदाहरण: 7,834 → 34 ÷ 4 = 8.5 → विभाज्य नहीं ✗
नियम: इकाई अंक को 2 से गुणा करके शेष संख्या में से घटाएँ। परिणाम 0 या 7 से विभाज्य हो।
उदाहरण: 343 → 34 - (3×2) = 34 - 6 = 28 → 28 ÷ 7 = 4 → विभाज्य ✓
उदाहरण: 161 → 16 - (1×2) = 14 → 14 ÷ 7 = 2 → विभाज्य ✓
उदाहरण: 245 → 24 - (5×2) = 14 → विभाज्य ✓
नियम: (विषम स्थानों के अंकों का योग) - (सम स्थानों के अंकों का योग) = 0 या 11 का गुणज
उदाहरण: 1,331 → (1+3) - (3+1) = 4 - 4 = 0 → विभाज्य ✓
उदाहरण: 12,342 → (2+3+1) - (4+2) = 6 - 6 = 0 → विभाज्य ✓
उदाहरण: 5,280 → (0+2) - (8+5) = 2 - 13 = -11 → विभाज्य ✓
पूर्ण अवधारणा, विधियाँ और उदाहरण
दो या अधिक संख्याओं का सबसे बड़ा उभयनिष्ठ गुणनखंड।
दो या अधिक संख्याओं का सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज।
HCF: उभयनिष्ठ × न्यूनतम घात (Common × Minimum power)
LCM: सभी × अधिकतम घात (All × Maximum power)
घातांक के नियम और करणी की अवधारणा
करणी: अपरिमेय संख्या जो $\sqrt[n]{a}$ के रूप में हो, जहाँ a परिमेय है और $\sqrt[n]{a}$ अपरिमेय है।
उदाहरण: $\sqrt{2}, \sqrt[3]{5}, \sqrt{7}$
परीक्षा में समय बचाने की तेज़ विधियाँ
11 से गुणा: अंकों के बीच उनका योग रखें
23 × 11 = 2(2+3)3 = 253
45 × 11 = 4(4+5)5 = 495
यदि योग ≥ 10, तो हासिल आगे जोड़ें: 78 × 11 = 7(15)8 = 858
5 पर समाप्त संख्या का वर्ग:
$(n5)^2 = n(n+1)$ और अंत में 25
25² = (2×3)25 = 625
35² = (3×4)25 = 1225
75² = (7×8)25 = 5625
संख्या n के लिए $\sqrt{n}$ तक की अभाज्य संख्याओं से भाग दें।
उदाहरण: 97 अभाज्य है?
$\sqrt{97} \approx 9.8$ → 2, 3, 5, 7 से जाँचें
कोई विभाजित नहीं करता → 97 अभाज्य है ✓
3 या 9 से भाग देने पर शेषफल:
अंकों के योग को 3 या 9 से भाग दें, वही शेषफल आएगा।
1234 ÷ 9 → 1+2+3+4 = 10 → 10 ÷ 9 → शेष = 1
∴ 1234 ÷ 9 का शेषफल = 1
दो संख्याओं का अंतर लो। HCF उस अंतर का गुणनखंड होगा।
उदाहरण: HCF(36, 60)
अंतर = 60 - 36 = 24
24 के गुणनखंड: 1, 2, 3, 4, 6, 8, 12, 24
बड़े से जाँचो: 24 से 36 विभाज्य नहीं, 12 से दोनों विभाज्य ✓
∴ HCF = 12
वज्र-गुणन (Cross-multiplication):
$\frac{a}{b}$ vs $\frac{c}{d}$ → a×d vs c×b
$\frac{3}{7}$ vs $\frac{2}{5}$ → 3×5=15 vs 2×7=14
15 > 14 → $\frac{3}{7} > \frac{2}{5}$
सबसे बड़ी संख्या से शुरू करो, उसके गुणज देखो।
उदाहरण: LCM(6, 8, 12)
बड़ी संख्या = 12
12 के गुणज: 12, 24, 36, 48...
24 → 6 से ✓, 8 से ✓, 12 से ✓
∴ LCM = 24
इकाई अंक से पहचान:
1³=1, 2³=8, 3³=27, 4³=64, 5³=125
6³=216, 7³=343, 8³=512, 9³=729, 10³=1000
इकाई अंक देखकर घनमूल का इकाई अंक बता सकते हैं!
उदा: 1728 → इकाई 8 → घनमूल का इकाई 2 → $\sqrt[3]{1728} = 12
1 से 200 तक की अभाज्य संख्याएँ:
आसानी से याद रखने की विधियाँ और महत्वपूर्ण बिंदु
N → W → Z → Q → R (हर बार समुच्चय बड़ा होता जाता है)
❌ 1 को अभाज्य मानना → 1 न अभाज्य है न भाज्य
❌ 0 को प्राकृत संख्या मानना → 0 पूर्ण संख्या है, प्राकृत नहीं
❌ 2 को भाज्य मानना → 2 अभाज्य है (सबसे छोटी अभाज्य)
❌ HCF × LCM = a×b को तीन संख्याओं पर लागू करना → यह केवल दो संख्याओं के लिए है
❌ $\sqrt{4}$ को अपरिमेय मानना → $\sqrt{4} = 2$ (परिमेय)
❌ हर भिन्न को परिमेय मानना → $\frac{\sqrt{2}}{3}$ परिमेय नहीं है (अंश पूर्णांक नहीं)
❌ $a^0 = 0$ मानना → $a^0 = 1$ (शून्य नहीं, एक!)
❌ $0^0$ को परिभाषित मानना → $0^0$ अपरिभाषित है
सरल से उन्नत स्तर तक — चरणबद्ध हल सहित
अभ्यास करें — उत्तर देखें — अपनी तैयारी जाँचें
कॉलम A को कॉलम B से मिलाएँ:
परीक्षा में सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्न और सामान्य जाल
बहुत से छात्र 1 या 3 लिख देते हैं। सही उत्तर 2 है। 1 न अभाज्य है न भाज्य।
$\frac{22}{7}$ केवल $\pi$ का सन्निकटन (approximation) है। $\frac{22}{7}$ परिमेय है, $\pi$ अपरिमेय है। ये बराबर नहीं हैं!
HCF × LCM = a × b केवल दो संख्याओं के लिए है। तीन संख्याओं के लिए यह सूत्र लागू नहीं होता!
$0.\overline{9} = 1$ है! यह गणितीय रूप से सिद्ध है। माना x = 0.999..., तो 10x = 9.999..., 10x - x = 9, 9x = 9, x = 1
गलत! $(\sqrt{2})^2 = 2$ जो परिमेय है। लेकिन $(\sqrt{2})^3 = 2\sqrt{2}$ जो अपरिमेय है।
परीक्षा से पहले अंतिम बार पढ़ें
🎓 शुभकामनाएँ! आप संख्या पद्धति में मास्टर बन गए हैं!