नृत्य क्या है? (What is Dance?)
नृत्य मानवीय भावनाओं की एक सबसे प्राचीन और सुंदर अभिव्यक्ति है। यह केवल शरीर के अंगों का संचालन नहीं है, बल्कि संगीत, लय और ताल के साथ आत्मा की भावनाओं को प्रदर्शित करने का एक माध्यम है। भारत में नृत्य को ईश्वर की आराधना, जीवन के उल्लास और संस्कृति के संरक्षण का एक अहम हिस्सा माना जाता है।
नृत्य का उद्भव कैसे हुआ? (Origin of Dance)
भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं ने भगवान ब्रह्मा से मनोरंजन का ऐसा साधन माँगा जो सभी वेदों का सार हो और सभी के लिए सुलभ हो, तब ब्रह्मा जी ने 'नाट्य वेद' (पाँचवाँ वेद) की रचना की। उन्होंने ऋग्वेद से पाठ्य (शब्द), सामवेद से संगीत (गान), यजुर्वेद से अभिनय (हाव-भाव) और अथर्ववेद से रस (भावनाएँ) लेकर नाट्य वेद का निर्माण किया। महर्षि भरत मुनि का 'नाट्य शास्त्र' भारतीय शास्त्रीय नृत्य और कला का सबसे प्राचीन व प्रामाणिक ग्रंथ माना जाता है। भगवान शिव के नृत्य रूप 'नटराज' को नृत्य का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है।
भारतीय नृत्य के प्रकार (Types of Indian Dances)
भारत में नृत्यों को मुख्य रूप से दो प्रमुख श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:
- शास्त्रीय नृत्य (Classical Dances): ये वे नृत्य हैं जो पूर्ण रूप से प्राचीन ग्रंथों (जैसे नाट्य शास्त्र) के नियमों और सिद्धांतों पर आधारित होते हैं। इन्हें सीखने के लिए गुरु-शिष्य परंपरा के तहत कड़े अनुशासन और लंबे अभ्यास की आवश्यकता होती है।
- लोक और जनजातीय नृत्य (Folk and Tribal Dances): ये नृत्य किसी विशिष्ट क्षेत्र, राज्य या जनजाति की स्थानीय संस्कृति, फसल कटाई, ऋतुओं या त्योहारों से जुड़े होते हैं। इनके लिए किसी कठोर शास्त्रीय नियम की आवश्यकता नहीं होती; ये उल्लास और समुदाय की खुशी का सहज प्रकटीकरण होते हैं।
भारत के 9 प्रमुख शास्त्रीय नृत्य
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1. भरतनाट्यम (तमिलनाडु)
सबसे प्राचीन नृत्य- मूल नाम: सादिर अट्टम (दासी अट्टम), क्योंकि यह मंदिरों में देवदासियों द्वारा किया जाता था।
- उत्पत्ति: यह भारत का सबसे पुराना शास्त्रीय नृत्य माना जाता है।
- नियम: इसके अधिकतर नियम नंदिकेश्वर द्वारा रचित 'अभिनय दर्पण' से लिए गए हैं।
- प्रमुख तत्व: भाव (Expression), राग (Melody) और ताल (Rhythm) (भ + र + त)।
- नृत्य के चरण (क्रम): अलारिपु (आरंभ), जतिस्वरम, शब्दम, वर्णम, पदम और तिल्लाना (अंत)।
- अग्नि तत्व: यह नृत्य 'अग्नि (Fire)' तत्व का प्रतीक माना जाता है।
- प्रमुख कलाकार: रुक्मिणी देवी अरुंडेल, यामिनी कृष्णमूर्ति, मृणालिनी साराभाई, टी. बालासरस्वती।
2. कथक (उत्तर प्रदेश)
कथाओं पर आधारित- शाब्दिक अर्थ: 'कथा कहे सो कथक कहावे' - यानी कहानी कहना।
- इतिहास: कथाकारों से शुरू होकर, इसे मुगल दरबारों में संरक्षण मिला। यह एकमात्र नृत्य है जो मुस्लिम संस्कृति से भी जुड़ा रहा।
- विशेषताएँ: जटिल फुटवर्क (पैरों का काम), तेज़ चक्कर (Spins / Chakkars) और घुटनों को बिना मोड़े नाचना इसकी पहचान है। घूँघरूओं का विशेष महत्व है।
- घराने:
- लखनऊ घराना (नवाबी शैली / भाव प्रधान)
- जयपुर घराना (तेज़ फुटवर्क और चक्कर)
- बनारस घराना
- प्रमुख कलाकार: पं. बिरजू महाराज, लच्छू महाराज, सितारा देवी, शोभना नारायण।
3. कथकली (केरल)
मुखौटा व भारी मेकअप- शाब्दिक अर्थ: कथा (Story) और कली (Play / Drama)।
- कहानियाँ: मुख्य रूप से रामायण, महाभारत और पुराणों की कथाओं का मंचन। बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाया जाता है।
- नियम: नर्तक मंच पर बिल्कुल नहीं बोलते। वे केवल हस्त मुद्राओं और आँखों/चेहरे के भावों (Nava Rasas) से संवाद करते हैं।
- रंग रूप (Color Code):
- हरा (Pacha): देवताओं / नायक के लिए (अच्छाई)
- लाल / काला (Thadi / Katti): राक्षसों और बुराई के लिए
- पीला (Minukku): महिलाओं या साधुओं के लिए
- विशेषता: आसमान तत्व (Sky/Ether) का प्रतीक। मुख्य रूप से पुरुषों द्वारा।
- प्रमुख कलाकार: कलामंडलम गोपी, रीता गांगुली, संकर्न नंबूदरी।
4. कुचिपुड़ी (आंध्र प्रदेश)
गायन + नृत्य- उत्पत्ति: कृष्णा जिले के 'कुचिपुड़ी' गांव से। इसका प्रारंभिक रूप 'भागवत मेला' नाटकों से जुड़ा है।
- अंतर: भरतनाट्यम की तरह दिखता है, लेकिन इसमें नर्तक नाचते हुए खुद गाते भी हैं और संवाद भी बोलते हैं।
- प्रसिद्ध रूप 'तरंगम': कुचिपुड़ी का सबसे कठिन और प्रसिद्ध हिस्सा। इसमें नर्तक पीतल की थाली (Brass plate) के किनारों पर खड़े होकर सिर पर पानी से भरा मटका रखकर नृत्य करता है।
- तत्व: यह 'पृथ्वी (Earth)' तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।
- प्रमुख कलाकार: राधा रेड्डी, राजा रेड्डी, यामिनी कृष्णमूर्ति, शोभा नायडू।
5. ओडिसी (ओडिशा)
त्रिभंग मुद्रा- इतिहास: उदयगिरि-खंडगिरि की गुफाओं में उल्लेख मिलता है। यह मंदिरों में 'महारी' (देवदासियों) और 'गोटीपुआ' (लड़कों) द्वारा किया जाता था।
- समर्पण: मुख्य रूप से भगवान जगन्नाथ को समर्पित।
- विशेष मुद्रा 'त्रिभंग': शरीर को तीन हिस्सों में मोड़ना (सिर, वक्ष/छाती और कमर)। यह भारतीय मूर्तिकला जैसी पोज़ बनाता है।
- तत्व: यह 'जल (Water)' तत्व का प्रतीक है।
- प्रमुख कलाकार: गुरु केलुचरण महापात्र, सोनल मानसिंह, संयुक्त पाणिग्रही, माधवी मुदगल।
6. मणिपुरी (मणिपुर)
रासलीला- उत्पत्ति: 'लाई हरोबा' उत्सव में इसकी जड़ें हैं। वैष्णववाद के प्रभाव में यह राधा-कृष्ण की रासलीला के रूप में विकसित हुआ।
- शैली: यह नृत्य बहुत ही कोमल (सौम्य) होता है। इसमें घुंघरुओं का प्रयोग नहीं होता है और कदम ज़मीन पर ज़ोर से नहीं मारे जाते।
- वेशभूषा: नर्तकियाँ एक विशेष कड़ा घाघरा पहनती हैं जिसे 'पोतलोई' या 'कुमिल' कहा जाता है। इसमें 'पुंग चोलोम' (ड्रम बजाते हुए नृत्य) भी शामिल होता है।
- प्रमुख कलाकार: झावेरी बहनें (सवर्णा, रंजना, दर्शना, नयना), गुरु बिपिन सिंह।
7. मोहिनीअट्टम (केरल)
एकल महिला नृत्य- अर्थ: 'मोहिनी' (Enchantress - मन मोहने वाली) + 'अट्टम' (नृत्य)।
- कथा: विष्णु भगवान द्वारा भस्मासुर वध या समुद्र मंथन के दौरान लिए गए 'मोहिनी' रूप पर आधारित।
- प्रदर्शन: यह केवल महिलाओं (Solo) द्वारा किया जाने वाला बहुत ही लयात्मक और शांत नृत्य है।
- वेशभूषा: सफेद या ऑफ-व्हाइट रंग की 'कसावु' साड़ी (सुनहरी पट्टी वाली) और बालों में सफेद चमेली (मोंगरा)।
- तत्व: यह 'वायु (Air)' तत्व का प्रतीक है।
- प्रमुख कलाकार: कलामंडलम कल्याणीकुट्टी अम्मा, सुनंदा नायर।
8. सत्रीया (असम)
भक्ति आंदोलन- उत्पत्ति: 15वीं सदी में महान वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव द्वारा इसे शुरू किया गया था।
- स्थान: यह असम के 'सत्र' (Sattras - वैष्णव मठों) में भिक्षुओं द्वारा भगवान कृष्ण की स्तुति में किया जाता था।
- विशेषता: इसमें 'बोरगीत' (शंकरदेव द्वारा रचित गीत) पर नृत्य होता है। यह नाटकों का हिस्सा होता है जिसे 'अंकिया नाट' कहते हैं।
- मान्यता: इसे वर्ष 2000 में संगीत नाटक अकादमी द्वारा शास्त्रीय नृत्य का दर्जा मिला।
- प्रमुख कलाकार: गुरु जतिन गोस्वामी, शरत शारदी सैकिया।
9. छऊ (झारखंड, ओडिशा, प. बंगाल)
युद्ध कला / मार्शल आर्ट्स- मान्यता: इसे संस्कृति मंत्रालय द्वारा भारत के 9वें शास्त्रीय नृत्य के रूप में गिना जाता है। यह एक अर्ध-शास्त्रीय (Semi-Classical) और युद्ध कला (Martial arts) नृत्य है।
- शैलियां (3 प्रकार):
- सेरायकेला छऊ (झारखंड): मुखौटे का प्रयोग होता है।
- पुरुलिया छऊ (पश्चिम बंगाल): बड़े और भारी मुखौटों का प्रयोग।
- मयूरभंज छऊ (ओडिशा): इसमें मुखौटे का प्रयोग नहीं होता है।
- कहानियाँ: रामायण, महाभारत और शिव-पार्वती की कथाओं का मंचन खुले मैदान में किया जाता है (वसंत ऋतु में)।
- यूनेस्को: 2010 में इसे UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया था।
भारत के प्रमुख लोक नृत्य (राज्यवार)
| राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | प्रमुख लोक नृत्य |
|---|---|
| असम (Assam) | बिहु, बिछुआ, नटपूजा, महारास, कलिगोपाल, बगुरुम्बा, नागा नृत्य |
| गुजरात (Gujarat) | गरबा, डांडिया रास, भवाई, टिप्पनी जुरियुन |
| राजस्थान (Rajasthan) | घूमर, कालबेलिया, भवाई, कच्ची घोड़ी, चरी नृत्य, कठपुतली |
| महाराष्ट्र (Maharashtra) | लावणी, तमाशा, नकता, कोली, गाफा |
| पंजाब (Punjab) | भांगड़ा (पुरुष), गिद्दा (महिलाएं), डफ, धमन, भांड |
| जम्मू और कश्मीर (J&K) | रऊफ (रुफ), हिकत, मंदजास, कूद दंडी नाच |
| केरल (Kerala) | ओट्टम थुलाल, कैकोट्टिकली, थेय्यम |
| छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) | राउत नाचा, पंथी, कर्मा, सुआ, पंडवानी, कपालिक |
| मध्य प्रदेश (MP) | जवारा, मटकी, आड़ा, खड़ा नाच, फूलपती, ग्रिडा नृत्य |
| पश्चिम बंगाल (WB) | बाउल, कीर्तन, जात्रा, ढाली, गंभीरा |
| उत्तर प्रदेश (UP) | नौटंकी, रासलीला, कजरी, झोरा, छपेली, जैता |
| झारखंड (Jharkhand) | झूमर (जनानी/मर्दाना), पैका, फगुआ, मुंडारी नृत्य, सरहुल, डमकच |
| कर्नाटक (Karnataka) | यक्षगान, हुट्टारी, सुग्गी, कुनिथा, करगा |
| उत्तराखंड (Uttarakhand) | गढ़वाली, कुमायुनी, कजरी, झोरा, रासलीला, चपेली |
| हिमाचल प्रदेश (HP) | झोरा, झाली, छारही, धामन, छपेली, महासू, नटी, डांगी |
| ओडिशा (Odisha) | सवारी, घुमुरा, पैंका, मुनारी, गोटीपुआ |
| बिहार (Bihar) | जाता-जतिन, बाखो-बखैन, पनवरिया, सामा चकवा, बिदेसिया |
| मेघालय (Meghalaya) | लाहो, बांग्ला नृत्य (Nongkrem) |
| मिजोरम (Mizoram) | चेराव नृत्य (बांस नृत्य / Bamboo Dance), खुल्लम, चेलम |